Wednesday, July 15, 2026

फिर जाना मैंने...हुआ वही,जो दिल ने माना। Zindagi....


ज़िंदगी...

कभी सबसे ख़ास,
कभी बहुत उदास,
कभी लगता है जैसे
कुछ भी नहीं है पास।

कभी हँसी की धूप,
कभी यादों की शाम,
हर मोड़ पर बदलता रहा
ज़िंदगी का नाम।

फिर जाना मैंने...
हुआ वही,
जो दिल ने माना।

ज़िंदगी तो आईने-सी है,
जो मन में हो, वही दिखाती है।
होंठों पर मुस्कान हो तो
हर राह गुलज़ार नज़र आती है,
और आँखों में उदासी हो तो
महफ़िल भी वीरान लग जाती है।

फिर क्यों न चुनूँ मैं
हर सुबह में एक नई उम्मीद,
हर शाम में एक नया सबक़...

क्योंकि ज़िंदगी वही कहानी लिखती है,
जिसे हमारा मन यक़ीन से जीता है।

By Parul Bhatnagar 
15th July 2026